शनिवार, 22 नवंबर 2014

Motive

इस अदभुत नज़ारे को देखने के लिए सारा दरबार लोगों से खचाखच भरा हुआ था और पैर रखने को तिल भर की जगह भी न थी। औरंगजेब को उसके जुर्म का ब्यौरा पढ़कर सुनाया गया। असल बात यह थी कि औरंगजेब के भाई मुराद को गुजरात का शासन सौंपा गया था। शाहजहाँ जब बीमार पड़ा, तो उसने खुद को ही गुजरात का शासक घोषित कर दिया। जब उसे खुद के नाम से सिक्के जारी करने के लिए पैसे की जरूरत महसूस हुई, तो उसने मोहम्मद मोहसिन से पाँच लाख रूपये उधार ले लिए थे। इस बीच औरंगजेब ने अपने बाप शाहजहाँ को कैद करके शासन हथिया लिया और अपने तीनो भाइयों- दाराशिकोह, शुजा और मुराद का क़त्ल करवा दिया।

इसके अलावा उनकी सारी सम्पत्ति भी अपने खजाने में जमा कर ली। इस तरह मोहसिन से लिए गए रूपये भी उसके खजाने में जमा हो गए। जब औरंगजेब ने अपने अपराध के प्रति जानकारी न होने की बात कही, तो उसे मोहसिन के पास का दस्तावेज दिखाया गया। उसे देखकर बादशाह ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया। न्यायाधीश(क़ाज़ी) ने औरंगजेब को रूपये अदा करने का हुक्म दिया। औरंगजेब ने पाँच लाख रूपये शाही खजाने से निकलवाये और उन थैलियों को मोहसिन को देने के लिए पेश किया। बादशाह की यह न्यायप्रियता देखकर मोहसिन की आँखों में आंसू आ गए। वह झुककर सलाम करते हुए बोला, “जहाँपनाह, ये रूपये शाही खजाने में दोबारा जमा कर दिये जाये, यह रही रसीद। बादशाह के इन्साफ को देखकर मै बहुत ही शर्मिंदा हूँ।"

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